प्रेम संबंधों की रंजिश में रची गई थी हत्या की साजिश, तीनों आरोपीयों को उम्रकैद
मुख्य बिंदु:
प्रेम संबंधों में उपजे विवाद ने चाय विक्रेता विकास गर्ग की जान ले ली। महिला द्वारा रची गई साजिश और डिजिटल साक्ष्यों के दम पर पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफाश किया, जिसके बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
मथुरा/वृंदावन । करीब ढाई साल पहले वृंदावन में हुए चर्चित विकास गर्ग हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए महिला सहित तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। प्रेम संबंधों में पैदा हुए विवाद के बाद इस हत्या की साजिश रची गई थी, जिसे राजस्थान से बुलाए गए दो सुपारी किलरों ने अंजाम दिया था।
चाय विक्रेता की निर्मम हत्या से मचा था सनसनी
राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी विकास गर्ग वर्ष 2023 में वृंदावन आकर चाय का स्टॉल संचालित कर रहे थे। इसी दौरान उनकी पहचान श्रीगंगानगर की रहने वाली पूजा से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, लेकिन बाद में संबंधों में खटास आ गई। अभियोजन के अनुसार इसी विवाद के चलते पूजा ने विकास को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
सुनसान स्थान पर ले जाकर बरसाईं लोहे की सरियां
25 अक्टूबर 2023 की रात रणमीत उर्फ राजन और अमन पुंशी विकास को बहाने से रामनरेती क्षेत्र में ले गए। वहां पहले से बनाई गई योजना के तहत उसके सिर पर लोहे की सरियों से ताबड़तोड़ वार किए गए। हमले में विकास की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद शव को वाणी आश्रम के समीप नाले में फेंक दिया गया। आरोपियों ने वारदात का वीडियो बनाकर साजिशकर्ता महिला को भेजा और फरार हो गए।
पुलिस जांच में खुला कत्ल का राज
हत्या की जांच तत्कालीन इंस्पेक्टर क्राइम धर्मेंद्र कुमार को सौंपी गई थी। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर विकास और पूजा के संबंधों की कड़ियां जोड़ीं। जांच आगे बढ़ी तो हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हो गया। पुलिस ने पहले पूजा को गिरफ्तार किया, जिसके बाद दोनों सुपारी किलरों को भी दबोच लिया गया।
CCTV और मोबाइल डेटा बने निर्णायक सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर एडीजे स्पेशल ईसी एक्ट राजेश पाराशर की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
फैसले के बाद फिर भेजे गए जेल
एडीजीसी क्राइम मुकेश गोस्वामी ने बताया कि अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की भूमिका को संदेह से परे साबित करते हैं। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को पुनः जेल भेज दिया गया।