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भागवत कथा में हुआ '60 नॉट आउट' का लोकार्पण, साध्वी ऋतंभरा बोलीं— 60 के बाद शुरू होती है नई जिंदगी

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14 जुलाई 2026, 07:56 PM
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भागवत कथा में हुआ '60 नॉट आउट' का लोकार्पण, साध्वी ऋतंभरा बोलीं— 60 के बाद शुरू होती है नई जिंदगी

छटीकरा मार्ग स्थित श्री कृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में चल रही स्वामी गिरीशानंद की श्रीमद् भागवत कथा के मध्य झारखंड के दैनिक समाचार पत्र " रांची एक्स्प्रेस" के पूर्व पत्रकार एवं एकल विद्यालय फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया के पूर्व अध्यक्ष विजय मारू की पुस्तक "60 नॉट आउट" का लोकार्पण पद्मभूषण विभूषित साध्वी ऋतंभरा एवं स्वामी गिरीशानंद महाराज द्वारा किया गया।लोकार्पण करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि हम बालकों के मस्तक को चूमते हैं किन्तु बुजुर्गों के चरणों चूमते हैं  इसका कारण है उनके जीवन के अनुभवों को ग्रहण करना।

स्वास्थ्य हमारे जीवन की अमूल्य पूंजी है, यदि हम स्वस्थ्य है जीवन के सारे सुख प्राप्त कर सकते हैं।साहित्य समाज की अभिव्यक्ति है लेखक अपने चिंतन से समाज की विसंगतियों को ही नहीं उठाता उनका समाधान भी देता है। लोगों के नकारात्मक विचारों को सकारात्मक बनाने का चिंतन भी देता है।विजय मारू की  "60 नॉट आउट" स्वयं को रिटायर्ड समझने वाले निराश- हताश लोगों के लिए संवल बनेगी, उनके हौसलों को ताकत देगी। यह पुस्तक वरिष्ठ नागरिकों के सक्रिय सम्मानजनक और उद्देश्य पूर्ण जीवन को समर्पित है कि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन के स्वर्णिम वर्ष निष्क्रियता के नहीं  बल्कि स्वास्थ्य, सक्रियता, आत्मनिर्भरता,एवं आनन्द पूर्वक जीने के बर्ष हो सकते हैं।

स्वामी गिरीशानन्द ने आशीर्वाद देते हुए कहा विजय मारू ने सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद वरिष्ठ नागरिकों के दर्द को समझा और उसे दूर करने के प्रयास को " साठ नॉट आउट" पुस्तक के रूप में संजोया है। पुस्तक का सन्देश स्पष्ट है कि साठ वर्ष जीवन का अन्त नहीं बल्कि . एक नई और सार्थक शुरुआत है।आपका मानना है कि वरिष्ठजनों का यही कार्य भारत की सांस्कृतिक और विश्वव्यापी विरासत को भारत की आगामी पीढ़ी को हस्तांतरित करेगा  और भावी पीढ़ी को परिवार, समाज और राष्ट्र की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए तैयार करेगा।पुस्तक के लेखक विजय मारू ने बताया कि पुस्तक के लेख किसी शोध का परिणाम नहीं नहीं हैं बल्कि जीवन को निकट से देखने, समझने और अनुभव करने की संवेदनशील  यात्रा के पड़ाव हैं।इसमें कहीं अनुभव हैं, कहीं प्रेरणा है तो कहीं आत्म मंथन और कहीं जीवन को नये उत्साह के साथ अपनाने का सन्देश है।इस अवसर पर परमशक्ति पीठ के राष्ट्रीय सचिव संजय गुप्ता, रमाकान्त उपाध्याय, महन्त श्री फूलडोल दास महाराज, महन्त लाड़ली दास जी,सी.वी पाटोदिया, साध्वी साक्षी चेतना, स्वामी सत्यशील आदि की विशेष उपस्थिति रही। संचालन संजीव टेकरीवाल ने किया।