वायु आहार पर तपस्या करने वाले अवधूत दादा गुरु का कल होगा ब्रज आगमन, तीन दिवसीय प्रवास में करेंगे वृंदावन व गोवर्धन परिक्रमा
मुख्य बिंदु:
वायु आहार पर तपस्या करने वाले संत अवधूत दादा गुरु मंगलवार को तीन दिवसीय प्रवास पर ब्रज पहुंचेंगे। इस दौरान वे वृंदावन और गोवर्धन परिक्रमा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे तथा सनातन संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देंगे।
मथुरा/वृंदावन। चार संप्रदाय आश्रम में आयोजित अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत कथा एवं विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत वायु पर जीवन यापन करने वाले तपस्वी संत अवधूत दादा गुरु मंगलवार को ब्रजधाम पहुंचेंगे। वे 9 से 11 जून तक ब्रज में प्रवास कर विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे।
साध्वी सत्यप्रिया ने बताया कि अवधूत दादा गुरु पिछले छह वर्षों से केवल वायु ग्रहण करते हुए तप साधना में लीन हैं। उनका ब्रज आगमन श्रद्धालुओं और ब्रजवासियों के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर है। उन्होंने कहा कि दादा गुरु के संकल्प से ही आश्रम में विशेष अनुष्ठान संचालित हो रहा है।
नंदी-भोलेनाथ मिलन का संकल्प बना आध्यात्मिक अभियान
साध्वी सत्यप्रिया के अनुसार दादा गुरु का प्रमुख संकल्प काशी के नंदी का भगवान भोलेनाथ से मिलन कराना है। अधिक मास में मां यमुना की गोद से शुरू हुआ यह संकल्प अब व्यापक आध्यात्मिक अभियान का रूप ले चुका है। उनका दावा है कि आने वाले तीन वर्षों में इस संकल्प की पूर्णता लोग स्वयं देखेंगे।
10 जून को वृंदावन, 11 जून को गोवर्धन परिक्रमा
कार्यक्रम के अनुसार दादा गुरु 10 जून को शाम पांच बजे वृंदावन धाम की परिक्रमा करेंगे, जबकि 11 जून को गोवर्धन परिक्रमा में शामिल होंगे। उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है।
प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
साध्वी सत्यप्रिया ने कहा कि दादा गुरु लगातार नदियों, वृक्षों और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज को निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवस्वरूप माना गया है और मानव सभ्यता का भविष्य प्रकृति संरक्षण से ही सुरक्षित रह सकता है।
साधना पद्धति पर वैज्ञानिक अध्ययन की संभावना
साध्वी सत्यप्रिया ने दावा किया कि दादा गुरु की साधना और जीवन पद्धति को लेकर विभिन्न स्तरों पर रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह विषय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संज्ञान में है तथा भविष्य में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भी इस दिशा में अध्ययन या प्रशिक्षण की संभावना बन सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।