वृंदावन में कानून का खौफ खत्म? युवक से मोबाइल झपटकर फरार हुए बदमाश
मुख्य बिंदु:
धर्मनगरी वृंदावन में बदमाशों के हौसले बुलंद और पुलिस की मुस्तैदी सवालों के घेरे में नजर आ रही है। परिक्रमा मार्ग पर युवक से हुई छिनैती की वारदात ने सुरक्षा इंतज़ामात की हक़ीक़त उजागर कर दी है। बाइक सवार बदमाश युवक का मोबाइल झपटकर फरार हो गए, जबकि पुलिस गश्त कहीं दिखाई नहीं दी। इस वाकये के बाद स्थानीय लोगों में ख़ौफ़ और नाराज़गी का माहौल है तथा वृंदावन पुलिस की कारगुज़ारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मथुरा/वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माने जाने वाले परिक्रमा मार्ग पर दिनदहाड़े हुई छिनैती की वारदात ने पुलिस की गश्त व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। बदमाश इस कदर बेखौफ हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देकर आराम से फरार हो जा रहे हैं, जबकि पुलिस का कहीं अता-पता नजर नहीं आता।
मिली जानकारी के मुताबिक गौशाला नगर निवासी अंशु तिवारी परिक्रमा मार्ग स्थित गोरे दाऊजी के समीप से गुजर रहे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार दो बदमाश आए और झपट्टा मारकर उनके हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया। इससे पहले कि युवक कुछ समझ पाता, आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।
घटना के बाद पीड़ित ने वृंदावन कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी और कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई। लेकिन इस वारदात ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब पुलिस प्रशासन को देना चाहिए। आखिर जिस परिक्रमा मार्ग पर हर समय श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही रहती है, वहां बदमाश इतनी आसानी से वारदात को अंजाम कैसे दे रहे हैं? यदि वृंदावन पुलिस की गश्त नियमित और प्रभावी है तो अपराधियों में कानून का खौफ क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से झपटमारी और छिनैती की घटनाओं में इजाफा देखने को मिला है, लेकिन वृंदावन पुलिस इन घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। लोगों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नजर आती है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
धर्मनगरी में आने वाले श्रद्धालु जहां भगवान के दर्शन और आध्यात्मिक शांति की तलाश में आते हैं, वहीं इस तरह की वारदातें उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले का खुलासा कर बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचाती है या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल इस वारदात ने वृंदावन पुलिस की कार्यशैली, गश्त व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।