वृंदावन में 'दोस्ती' की आड़ में 2.90 करोड़ की लूट, जैंत पुलिस ने 24 घंटे में पलटा खेल
वृंदावन का 'विश्वासघात': 2.90 करोड़ की डकैती और पुलिस का 'मिशन रिकवरी'
यह कहानी एक ऐसे पिता की है जिसने अपनी पत्नी के देहांत के बाद अपने बेटे की प्रेरणा से वृंदावन में बसने का सपना देखा था। वह अपनी मेहनत की सारी कमाई—2 करोड़ 90 लाख रुपये—लेकर इस पुण्य भूमि पर आए थे, ताकि अपना शेष जीवन गायों की सेवा और गरीबों की मदद में बिता सकें। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस पड़ोस में वे रह रहे हैं, वहां फरिश्ते नहीं, बल्कि 'भेड़िये' घात लगाए बैठे हैं।
राकेश प्रजापति, जो गुजरात के गांधीनगर से अपनी पूरी जमा-पूंजी लेकर यहाँ आए थे, सुनरख क्षेत्र में रहने लगे। पास में ही गेस्ट हाउस चलाने वाले आलोक और राजन ने पहले उनकी दोस्ती जीती। यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि बाबा ने उन पर आँख मूँद कर भरोसा किया। लेकिन राजन और आलोक की निगाहें बाबा के इरादों पर नहीं, बल्कि उनकी अलमारी में रखी करोड़ों की नकदी पर थीं।
राजन और आलोक—ये नाम सुनने में साधारण लगते थे, लेकिन इनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। पास ही गेस्ट हाउस चलाने वाले इन शातिरों ने बड़ी होशियारी से बाबा (राकेश प्रजापति) का भरोसा जीता। धीरे-धीरे उन्होंने बाबा की आर्थिक स्थिति और घर की सुरक्षा की पूरी जानकारी जुटा ली।
14 जुलाई की वह काली शाम उनके लिए 'ऑपरेशन लूट' का दिन थी।साजिश इतनी पुख्ता थी कि बाबा को भनक तक नहीं लगी। प्लॉट दिखाने के बहाने उन्हें तहसील मांट ले जाकर बंधक बना लिया गया। उधर, उनके घर पर ताले तोड़े जा रहे थे। जब बाबा के घर की तिजोरी खुली, तो उसमें रखे 2 करोड़ 90 लाख रुपये गायब हो चुके थे। जान से मारने की धमकी ने बाबा को लंबे समय तक चुप रहने पर मजबूर कर दिया।
लूट के बाद आरोपी इतने बेखौफ हो गए थे कि उन्होंने चोरी के रुपयों से अपनी दुनिया ही बदल दी। एप्पल 17 प्रो मैक्स, सैमसंग फोल्ड 7 जैसे महंगे फोन, वोक्सवैगन वर्टस और टाटा पंच जैसी गाड़ियाँ, और ब्रांडेड जिम किट—यह गिरोह लूट के पैसों से एक लग्जरी लाइफ जी रहा था। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जैंत पुलिस की 'सर्वेलांस' टीम उनकी हर आहट पर नजर रखे हुए है।
पुलिस के अनुसार, अपराधी बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहे थे, लेकिन कानून के हाथ उनसे ज्यादा लंबे थे। 14 जुलाई 2026 को जैसे ही उन्होंने एनएच-19 की ओर भागने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
जैंत पुलिस मेरे लिए भगवान का रूप"
गिरफ्तारी के बाद जब पीड़ित राकेश प्रजापति ने पुलिस का धन्यवाद किया, तो उनकी आँखों में आंसू थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मैं यहाँ गायों की सेवा और गरीबों के काम आने के लिए आया था, लेकिन मेरे अपनों ने ही मेरे साथ गद्दारी की। जैंत पुलिस ने जिस तरह मेरी पूरी मेहनत वापस दिलाई है, वे मेरे लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं।"
पुलिस ने चारों आरोपियों—राजन (फरीदाबाद), आलोक (कुशीनगर), प्रेम सागर (सूरत) और हीरेन (सूरत)—को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से 2 करोड़ रुपये की नकदी और 60 लाख से अधिक की संपत्ति बरामद की गई है।
यह घटना पूरे वृंदावन क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसने न केवल अपराधियों को एक सख्त संदेश दिया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि वृंदावन की मिट्टी में किसी भी अपराधी का बुरा खेल ज्यादा दिन नहीं चलता। जैंत पुलिस की तत्परता ने एक ऐसे पिता के सपने को बिखरने से बचा लिया, जिसने अपनी पूरी उम्र गरीबों की सेवा के नाम कर दी थी।