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बाँकेबिहारी कॉरिडोर पर पारदर्शिता की मांग तेज, परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के लिए दायर हुई आरटीआई

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02 जून 2026, 04:31 PM
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बाँकेबिहारी कॉरिडोर पर पारदर्शिता की मांग तेज, परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के लिए दायर हुई आरटीआई
मुख्य बिंदु:

बाँकेबिहारी कॉरिडोर परियोजना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई दायर कर डीपीआर, बजट, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास, मंदिर कोष और एएसआई अनुमति सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े इस बड़े प्रकल्प में पारदर्शिता और जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।

 मथुरा/वृन्दावन। प्रस्तावित श्री बाँकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना को लेकर जनमानस में व्याप्त असमंजस और विभिन्न सवालों के बीच परियोजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में वृन्दावन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं सोशल आउटरीच कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर ने जिलाधिकारी कार्यालय तथा मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम-2005 के तहत विस्तृत आवेदन दायर किया है।


परियोजना के वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर मांगी जानकारी


आरटीआई आवेदन में कॉरिडोर परियोजना से संबंधित सभी शासनादेशों, स्वीकृत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), कुल स्वीकृत बजट, अब तक हुए व्यय तथा प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा परियोजना से प्रभावित होने वाले भवनों, दुकानों और परिवारों की संख्या, मुआवजा निर्धारण के आधार तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।


‘पहले रजिस्ट्री, ज्यादा लाभ’ जैसी व्यवस्था पर उठाए सवाल


आवेदन में यह भी पूछा गया है कि क्या विभागीय अभिलेखों में शीघ्र रजिस्ट्री कराने वाले संपत्ति स्वामियों के लिए किसी विशेष पैकेज, अतिरिक्त लाभ अथवा “पहले आओ-पहले पाओ” जैसी किसी व्यवस्था का कोई उल्लेख है। यदि ऐसा कोई प्रावधान मौजूद है तो उससे संबंधित आदेशों एवं दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही उन अभिलेखों की जानकारी भी मांगी गई है जिनमें बाँकेबिहारी मंदिर कोष से रजिस्ट्रियां कराने का उल्लेख हो।


धरोहर संरक्षण और एएसआई अनुमति पर भी मांगा जवाब


दीपक पाराशर ने आरटीआई में प्राचीन श्रीराधाबल्लभ मंदिर एवं श्री मदनमोहन मंदिर के 100 मीटर संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों का विवरण मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि परियोजना के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमति तथा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) प्राप्त किए गए हैं या नहीं।


जनसुनवाई और बैठक कार्यवृत्त भी होंगे सार्वजनिक?


आवेदन में मंदिर प्रशासन, कोष संचालन व्यवस्था तथा कॉरिडोर परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाइयों एवं बैठकों के कार्यवृत्त (मिनट्स ऑफ मीटिंग) की जानकारी भी मांगी गई है। इससे परियोजना के निर्णयों और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।


‘आस्था के साथ जनहित भी जरूरी’


दीपक पाराशर का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस महत्वाकांक्षी प्रकल्प के संबंध में सभी तथ्य सार्वजनिक होना लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनहित की दृष्टि से आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ब्रज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए परियोजना से जुड़ी समस्त सूचनाएं पारदर्शी रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए।