“बिजली संकट पर JE संगठन का बड़ा खुलासा: ‘मेंटेनेंस सामग्री और मैनपॉवर की भारी कमी से चरमराई विद्युत व्यवस्था’”
मुख्य बिंदु:
वर्टिकल व्यवस्था की पुनर्समीक्षा करे विद्युत विभाग
भीषण गर्मी को देखते हुए मेंटनेंस स्टॉफ और सामग्री बढ़ाने की जरूरत
सूबे में विद्युत संकट अपने चरम पर है। तपिश भरी गर्मी में चारों तरफ विद्युत आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। खुद मुख्यमंत्री विभागीय अफसरों से विद्युत आपूर्ति की समीक्षा कर 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति के निर्देश दे रहे हैं।लेकिन हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति ने विद्युत संकट की जमीनी हकीकत बयां कर दी है। संगठन के अध्यक्ष इंजीनियर गोपाल वल्लभ पटेल ने पत्र में कहा है कि जोनल स्तर पर अधिकारियों द्वारा कई बिन्दुओं को लेकर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। खासतौर पर मेंटनेंस सामग्री और मैनपॉवर की वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराना है।जिससे विद्युत संकट को दूर करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच जूनियर इंजीनियर, प्रोन्नत अभियंता एवं अन्य विद्युतकर्मी मई माह में अब तक की सर्वाधिक 31,824 मेगावाट विद्युत मांग की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु तपती दोपहरी एवं पूरी रात जागकर लगातार फॉल्ट दूर करने में लगे हैं। इसके बावजूद आवश्यक अनुरक्षण सामग्री एवं पर्याप्त मैनपॉवर की कमी के कारण फॉल्ट दूर करने में अधिक समय लग रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।इं. पटेल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष गर्मियों में विद्युत उपकेंद्रों पर फॉल्ट निस्तारण हेतु अतिरिक्त अनुरक्षण गैंग उपलब्ध कराई जाती थी, जबकि इस वर्ष वह नहीं मिली और फीडरवार गैंग की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई। वर्तमान में पूरे उपकेंद्र के अनुरक्षण हेतु एक समय में मात्र एक गैंग उपलब्ध है, जिससे कार्यभार उपलब्ध मैनपॉवर क्षमता से कहीं अधिक हो गया है। साथ ही आवश्यक अनुरक्षण सामग्री की अपर्याप्त उपलब्धता ने भी समस्या को और बढ़ाया है।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कॉर्पोरेशन स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठकों में संबंधित अधिकारियों द्वारा सामग्री एवं मैनपॉवर की उपलब्धता को पर्याप्त बताया जा रहा है, जिससे दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि गर्मी का मौसम अभी लंबा चलेगा। ऐसे में विद्युत आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने हेतु विभाग में लागू वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की समीक्षा कर आवश्यक सुधार एवं अतिरिक्त मैनपॉवर की तैनाती अत्यंत आवश्यक है। साथ ही पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराई जाए, फेशियल अटेंडेंस प्रणाली को व्यवहारिक बनाया जाए तथा अनावश्यक उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों एवं ट्रांसफार्मर की क्षतिग्रस्तता पर वेतन कटौती पर रोक लगाकर विभाग में विश्वास एवं सकारात्मक कार्य वातावरण स्थापित किया जाए।
संगठन के केंद्रीय महासचिव इं. बलबीर यादव ने बताया कि संवर्गीय समस्याओं के प्रभावी समाधान हेतु संगठन द्वारा 12 मई से 22 मई 2026 के मध्य विभिन्न चरणों में प्रदेश के समस्त जनपदों में अधीक्षण अभियंताओं, मुख्य अभियंताओं एवं डिस्कॉम प्रबंध निदेशकों को ज्ञापन प्रेषित किए गए। ज्ञापन में उल्लिखित अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं, जो विद्युत व्यवस्था के निर्बाध संचालन से सीधे जुड़े हैं, पर अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है। संगठन के पत्र पर समय रहते प्रभावी कार्यवाही किया जाना निगमहित में आवश्यक है।
केंद्रीय महासचिव ने बताया कि अनावश्यक उत्पीड़न की कार्यवाहियों से संगठन के सदस्यों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, जो कॉर्पोरेशन हित में उचित नहीं है। उन्होंने ऊर्जा प्रबंधन से अपील की कि संवर्ग की ज्वलंत मांगों एवं समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए, ताकि जूनियर इंजीनियर एवं प्रोन्नत अभियंता प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप और अधिक मनोयोग से कार्य कर सकें।