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'राष्ट्र चेतना मंच' की काव्य गोष्ठी में कारगिल के रणबांकुरों को किया नमन

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26 जुलाई 2026, 12:56 PM
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'राष्ट्र चेतना मंच' की काव्य गोष्ठी में कारगिल के रणबांकुरों को किया नमन

सामाजिक साहित्यक संस्था "राष्ट्र चेतना मंच"  के तत्वाधान में कारगिल विजय दिवस पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन गौतम पाड़ा मोही निवास पर किया गया।जिसकी अध्यक्षता मोहन मोही ने की।       

कविगोष्ठी का शुभारंभ रेखा रानी की सरस्वती वन्दना से हुआ। संस्था के संस्थापक ओज कवि डॉक्टर उमाशंकर राही ने कारगिल विजय के वीरों को याद करते हुए कहा कि- 

कारगिल की घाटी गूँज उठी भारत मां के जयकारों से।। 

दुश्मन का दिल दहल गया वंदे मातरम के नारों से। 

ब्रजभाषा कवि ब्रजभूषण चतुर्वेदी दीपक ने कुछ इस प्रकार पढ़ा कि..

आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है।

कह देना गद्दार पाक से यह कश्मीर हमारा है।। संस्था के अध्यक्ष मोहन मोही ने रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि  जन- जन से समाज बनता है, जुड़े समाज राष्ट्र बनता है।

शिक्षक जैसी नीव गढ़ेगा, बैसा अपना राष्ट्र बनेगा।।

मथुरा से पधारे आचार्य निर्मल ने पढ़ा कि..

मर जायेंगे मिट जायेंगे, भारत के सम्मान पर।

आँच नहीं आने देंगे हम, अपने हिन्दुस्तान पर।।

संचालन कर रहे ब्रजकिशोर त्रिपाठी ने पढ़ा कि..

देश सेवा में समर्पित दीप से चलते रहे।

रक्त रंजित थी धरा वे शत्रु से लड़ते रहे।।

डॉ. अवधेश महारथी ने पढा कि..

थल बल, जल बल, नभ बल जय हे 

दृढ़ विश्वास प्रदाता।

श्रीमती रेखा रानी ने पढ़ा कि..

तिरंगे की उन्हीं खून से ये शान जिन्दा है।

मेरे भारत की उनसे ही तो पहचान जिन्दा है।।

सभी कवियों ने अपने काव्य के माध्यम से कारगिल विजय के शहीदों को स्मरण किया तथा हरिवंश खण्डेलवाल के जन्म दिवस पर उन्हें  भारत माता का चित्रपट देकर सम्मानित किया इस अवसर विश्वनाथ गुप्ता, डॉ. मारुति, गौतम,केशवदेव उपाध्याय, कृष्ण मुरारी अग्रवाल आदि ने वीर शहीदों को श्रदांजलि अर्पित की।