सीमा पर वीर जवानों की कलाइयों पर राखी सजाएंगी वृंदावन की बेटियां, अटारी और अखनूर बॉर्डर के लिए रवाना हुआ जत्था
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वृंदावन=देश की सीमा पर सुरक्षा में डटे जवानों की सूनी कलाइयों पर धार्मिक नगरी की बेटिया राखी सजाएंगी। बुधवार को संविदम गुरुकुलम से बेटियों का जत्था राखियां लेकर कल अटारी बार्डर और अखनूर बार्डर को रवाना हो गया है।
श्री रामजन्म भूमि आंदोलन में अग्रणीय भूमिका निभाने वाली दीदी मां साध्वी ऋतुम्भरा द्वारा संचालित वात्सल्य ग्राम के निर्देशन में विगत पच्चीस वर्ष से बॉर्डर पर तैनात वीर जवानों की कलाइयों पर राखी सजाने के लिए संविदंम गुरुकुल की बेटियां रक्षा सूत्र लेकर जाती है। राष्ट्ररक्षा सूत्र के रजत जयंती वर्ष पर जनपद ही नहीं बल्कि सुदूर प्रांतों की बच्चियों ने लाखों की संख्या में स्वनिर्मित राखियां दीदी मां को भेंट की। मंगलवार को वात्सल्य ग्राम के समविद सैनिक स्कूल में आयोजित एक समारोह में बालिकाओं द्वारा यह राखियां भेंट की गई। समारोह के विधिवत शुभारंभ के बाद स्कूली छात्राओं ने देशभक्ति परक गीतों पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर दीदी मां ने कहा कि अपनी भारत मां की आन बान और शान के लिए हर विपरीत परिस्थितियों में सीमा पर डटे रहने वाले हमारे सैनिक भाईयो के प्रति हमारा भी दायित्व बनता है।उन्हे अपनेपन का सुखद अहसास कराने के लिए हमारी बेटियां उनकी कलाइयों पर राखी बांधने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत माता की यह सजीव भूमि है।जो अपने बेटों को शौर्य और पराक्रम का पाठ पढ़ाती है। बदलते परिवेश में इस देश को सैन्य प्रथा और गुरुकुल पद्वति की आवश्यकता है। जिससे हमारे बच्चे संस्कारित और अनुशासित बन सके। युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज ने दीदी मां द्वारा संचालित किए जा रहे प्रोजेक्ट की सराहना की।28 अगस्त को अटारी बार्डर और बाघा बार्डर पर पर सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में रक्षा सूत्र बांधने के लिए बच्चियों का जत्था बुधवार की सुबह बॉर्डर के लिए रवाना हो गया है। इस मौके पर बच्चियों का उत्साह देखते ही बनता था। भारत माता और वन्देमातरम के गगनभेदी जयघोष के साथ बच्चियां अपने गंतव्य को रवाना हो गई।