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शरणागत भक्त को प्रार्थना की जरूरत नहीं : प्रेमानंद महाराज

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23 अगस्त 2026, 04:27 PM
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शरणागत भक्त को प्रार्थना की जरूरत नहीं : प्रेमानंद महाराज
मुख्य बिंदु:

यमुना विहार कुंज में संत प्रेमानंद महाराज ने दीक्षित शिष्यों से एकांतिक वार्ता में कहा कि पूर्ण शरणागति के बाद भक्त को भगवान से कुछ मांगने की जरूरत नहीं रहती। जब तन-मन-प्राण प्रभु को समर्पित हैं तो उनकी इच्छा ही सर्वोपरि है।

वृंदावन। प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों यमुना पार स्थित अपने आश्रम यमुना विहार कुंज में रहकर प्रिया-प्रियतम के भजन और साधना में लीन हैं। स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय से उनका एकांतिक वार्ता कार्यक्रम बंद है। हालांकि अब आश्रम में दीक्षित शिष्यों के साथ उनकी एकांतिक वार्ता और सत्संग का क्रम शुरू हुआ है।

यमुना तट पर आयोजित एकांतिक वार्ता में एक शिष्य ने महाराज से प्रश्न किया कि क्या शरणागत भक्त को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए? इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि पूर्ण शरणागति के बाद प्रार्थना की आवश्यकता नहीं रह जाती।

उन्होंने समझाते हुए कहा कि जब भक्त ने अपना तन, मन, प्राण और जीवन सब भगवान को समर्पित कर दिया, तब उसके पास अपना कुछ बचा ही नहीं कि वह अपने लिए प्रार्थना करे। महाराज ने कहा कि जब तक पूर्ण शरणागति नहीं होती, तब तक मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करता है।

उन्होंने कहा कि प्रार्थना सामान्यतः अपनी अच्छाई और अपनी मांगों की पूर्ति के लिए होती है, लेकिन जब भक्त पूरी तरह भगवान की शरण में चला जाता है तो उसके लिए भगवान की इच्छा ही सर्वोपरि हो जाती है। जो कुछ प्रभु कर रहे हैं, वह अच्छा ही है, ऐसी भावना पूर्ण शरणागति का आधार है।

प्रेमानंद महाराज का यह संदेश शिष्यों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।