“हमारे शरीर का समय पूरा हो गया…” — संत प्रेमानंद महाराज के भावुक शब्द सुन भक्त हुए भावविभोर
मुख्य बिंदु:
संत प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में भावुक शब्दों में कहा कि “हमारे शरीर का समय पूरा हो गया है, हम श्रीजी के पास पहुंच जाएंगे।” उनके इस बयान के बाद श्रद्धालुओं में भावुक माहौल बन गया। लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे महाराज की रात्रि पदयात्रा फिलहाल बंद है। प्रवचन के दौरान एक भक्त ने उनके साथ “निकुंज” जाने की बात कही, जिस पर महाराज ने समझाते हुए कहा कि जीवन सहज भाव से जीना चाहिए और कोई भी मनमाना कदम गलत होगा। महाराज के इस संदेश को भक्त आध्यात्मिक सीख के रूप में देख रहे हैं।
धार्मिक नगरी वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों अपने स्वास्थ्य को लेकर लगातार चर्चा में हैं। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे प्रेमानंद महाराज की रात्रि में निकलने वाली प्रसिद्ध पदयात्रा फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है। उनके दर्शन और पदयात्रा से जुड़े रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं में इसे लेकर गहरी मायूसी देखने को मिल रही है।
हालांकि खराब स्वास्थ्य के बावजूद प्रेमानंद महाराज निरंतर श्री राधा-कृष्ण भक्ति और साधना में लीन हैं। उनके प्रवचन आज भी लाखों लोगों के जीवन को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। महाराज अक्सर अपने भक्तों को “राधा नाम जप” को ही जीवन का सबसे बड़ा सार बताते हैं।
प्रवचन में बोले – “हम श्रीजी के पास पहुंच जाएंगे”
हाल ही में एक प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने ऐसा भावुक वक्तव्य दिया, जिसने भक्तों को भावुक कर दिया। एक भक्त ने महाराज से कहा कि वह उनके साथ “निकुंज” जाना चाहता है। इस पर महाराज ने बेहद शांत भाव से उत्तर देते हुए कहा—
“आना तो निकुंज ही है, बस ‘साथ’ यह शब्द थोड़ा संशययुक्त है। क्योंकि शरीर की आयु घटती-बढ़ती रहती है। आपकी आयु अभी और है, लेकिन हमारे शरीर का समय पूरा हो गया है। हम श्रीजी के पास पहुंच जाएंगे, आप थोड़ा विलंब से आएंगे, लेकिन आना एक ही जगह है।”महाराज के इन शब्दों ने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर भी उनका यह कथन तेजी से वायरल हो रहा है।
“ऐसा करोगे तो नरक जाओगे” — भक्त को दी सीख
प्रवचन के दौरान भक्त ने भावुक होकर कहा कि वह किसी भी तरह महाराज के साथ ही जाएगा और उनके बिना जीवन धारण नहीं कर पाएगा। इस पर प्रेमानंद महाराज ने भक्त को समझाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा—
“ऐसा करोगे तो नरक जाओगे, हमारे पास थोड़े ही आओगे। सहज में जीवन है, कोई मनमानी आचरण नहीं।”महाराज ने अपने इस संदेश के माध्यम से जीवन को सहजता और संयम के साथ जीने की सीख दी। उन्होंने संकेत दिया कि भक्ति का मार्ग त्याग, धैर्य और ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करने का मार्ग है, न कि भावनाओं में बहकर कोई अनुचित कदम उठाने का।
लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र हैं प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। उनके प्रवचन सुनने और दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त वृंदावन पहुंचते हैं। उनकी सादगी, भक्ति और राधा नाम के प्रति समर्पण ने उन्हें सनातन संस्कृति के प्रमुख संतों में स्थापित किया है।महाराज के स्वास्थ्य को लेकर भक्त लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।