वृंदावन में बंदरों का खौफ बरकरार, मोबाइल छुड़ाने की कोशिश में महिला हुई घायल

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उत्तर प्रेदश फीचर्ड
07 सितंबर 2026, 10:54 AM
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वृंदावन में बंदरों का खौफ बरकरार, मोबाइल छुड़ाने की कोशिश में महिला हुई घायल
मुख्य बिंदु:

बंदर महिला श्रद्धालु का मोबाइल छीनकर बाउंड्री पर जा बैठा। मोबाइल वापस लेने चढ़ी महिला संतुलन बिगड़ने से नीचे गिरकर घायल हो गई। हादसे के बाद बंदरों के आतंक को लेकर लोगों में रोष है।

वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन में बंदरों का आतंक एक बार फिर एक महिला श्रद्धालु के लिए जानलेवा साबित होते-होते रह गया। रविवार शाम लोई बाजार में बंदर द्वारा मोबाइल झपटे जाने के बाद उसे वापस लेने की कोशिश में महिला करीब एक मंजिल ऊंची बाउंड्री से नीचे जा गिरी। हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार शाम करीब छह बजे एक महिला श्रद्धालु लोई बाजार स्थित सेंट्रल बैंक के पास से गुजर रही थी। इसी दौरान एक बंदर उसके हाथ से मोबाइल झपटकर वहां सामने बने एक मकान की बाउंड्री पर जा बैठा। अपना मोबाइल वापस पाने की कोशिश में महिला भी बाउंड्री पर चढ़ गई और बंदर से मोबाइल छुड़ाने का प्रयास करने लगी।

बताया गया कि इसी दौरान महिला का अचानक संतुलन बिगड़ गया और वह करीब एक मंजिल ऊंची बाउंड्री से नीचे आ गिरी। महिला के गिरते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में महिला की कमर में चोट आई। मौके पर मौजूद दुकानदार और स्थानीय लोग तत्काल उसकी मदद के लिए दौड़े तथा घायल महिला को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल पहुंचाया।

घटना के बाद एक बार फिर वृंदावन में बंदरों के बढ़ते आतंक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। धार्मिक नगरी में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिरों और बाजारों में पहुंचते हैं, जहां बंदरों के झुंड अक्सर लोगों के हाथों से मोबाइल, चश्मे, प्रसाद और अन्य सामान छीन लेते हैं। सामान वापस लेने की कोशिश कई बार श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बन जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा पूर्व में बंदरों को पकड़ने के लिए कई बार अभियान चलाए गए। इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। नतीजा यह है कि बंदरों के आतंक का खामियाजा स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी भुगतना पड़ रहा है।

वृंदावन में बंदरों के हमलों और उनके आतंक के चलते पूर्व में कई लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। इसके बावजूद बंदरों की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।