“ब्रज को अयोध्या-काशी की कॉपी मत बनाइए, ब्रज को ब्रज ही रहने दीजिए” — दीपक पाराशर
*बृज को अपनी पहचान के अनुरूप विकास चाहिए, अयोध्या-काशी की तर्ज़ पर नहीं : दीपक पाराशर*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने लगभग नौ वर्ष के कार्यकाल में 20वीं बार श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचने पर रचनात्मक कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी से बृज की जनता का सीधा सवाल है कि मथुरा-वृंदावन को काशी और अयोध्या की तर्ज पर ही क्यों विकसित करके सजाया संवारा जाएगा?
उन्होंने कहा कि काशी की अपनी आत्मा है, अयोध्या की अपनी पहचान है और ब्रज की अपनी हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक पहचान है। बृज कोई खाली जमीन नहीं है, जिसे बुलडोजर से साफ कर नया शहर खड़ा कर दिया जाए। बृज अपनी कुंज गलियों, मंदिरों, घाटों, परंपराओं और ब्रजवासियों की आस्था में बसता है।
दीपक पाराशर ने कहा कि विकास के नाम पर यदि स्थानीय लोगों के घर-दुकान उजड़ते हैं और वर्षों से सेवा-पूजा करते आ रहे गोस्वामियों-पुजारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो सरकार को इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि मंदिरों के चंदे-चढ़ावे और धार्मिक अर्थव्यवस्था पर किसी निजी या कॉरपोरेट हित को बढ़ावा तो नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पांच सवाल पूछे—क्या बिजली, सड़क, ट्रैफिक-पार्किंग, सफाई-सीवर जैसी मूल समस्याएं समाप्त हो गई हैं? और क्या विकास परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले बृजवासियों की चिंता दूर हो गई है?
दीपक पाराशर ने कहा कि बृज को अयोध्या या काशी की कॉपी मत बनाइए, बृज को ब्रज ही रहने दीजिए और ब्रज के अनुरूप सजाइए-संवारिए। यहां कॉरिडोर से पहले सुविधा, घोषणाओं से पहले धरातलीय विकास और सबसे बढ़कर भक्त और भगवान के बीच सीधा संबंध चाहिए।”